Tuesday, November 19, 2019

आज के दिन में क्या विशेष है , अगर यह लिखने बैठूं , तो सबसे पहले यह
कि
यह लाक हो गया ब्लॉग खुल पड़ा है आज . ( बेशक नेहा की सहायता से  )

अभी तक हिमालय ट्रेकिंग की बात पूरी नहीं लिख पाई हूँ ,

हालाँकि वह यात्रा हर दिन याद  रहती है , वह अनुभव , वह गहरी थकन ,
 वह समय मेरे साथ चला है  - डेनमार्क में , इटली और जर्मनी में - हर जगह . भारत  लौट आने पर भी वह अनुभूति हर दिन याद आती है .

हिमालय देवता है.... .   क्या इसलिए ?
यह तो एक कारण है ही , यह भी कारण है कि मैं स्वयं  को विश्वाश दिलाना चाहती हूँ कि उतनी बड़ी यात्रा मैंने की है .

Thursday, March 8, 2018

NEW BOOK

एक वर्ष बाद इसे खोला है , वह भी किसी की सहायता से , यह कहानी संग्रह , जो न जाने कब से अपेक्षित था .   इसे छापा था अनामिका पब्लिशर्स ने .  

Saturday, December 24, 2016

आज के दिन यह ब्लॉग  खुद से खोलना मैंने सिखा , अब यहाँ पोस्ट करूंगी .
इसके पहले नेहा पाखी ने इस पर पोस्ट डाले थे .

Monday, June 30, 2014

दीमकों की बस्ती

वह खुद से डरता है
एक अनजाने भय के आकाश तले अनाम चिंता से मन ही मन कांपता हुआ
बिलावजह बेबात नए कलहों में उलझ जाता है

मुख्य द्वार पर
पिता के बनवाए शानदार मकान के प्रथम खम्भे पर से
उसने
पिता का नाम बेझिझक मिटा दिया है
अपने नाम की जगमगाती तख्ती टाँग दी है

रुग्ण माता के हस्ताक्षर के बल पर
सारी संपत्ति का मालिक बन
तीज-त्योहारों पर बहनों को न्योता-पिहानी नहीं भेजता ..........
................
…………………

ऊपर से पुख्ता दिखती दीवारों के नीचे
दीमकों की पूरी बस्ती रहती है
उसे वर्तमान का डर नहीं है
वह भविष्य से डरता है
आनेवाले वर्षों में अपने पुत्र के बनाये
नए उसूलों की कल्पना
उसे सोने नहीं देती

वह खुद से ही डरता है
स्वप्न में किये गए दुष्कर्म की भाँति।