Monday, April 13, 2020

वेदान्त का पन्ना

वेदान्त  का पन्ना 

चित्त  : कुछ  बिम्ब 

दिन प्रतिदिन की  भागदौड़  के बीच  कई बार  ऐसा  होता  है कि  अच्छे  धुले   कलफदार  पकड़ें से सजा  हमारा व्यक्ति त्व  कांति  बिखेरता  दीख पड़ता  है , शरीर  भी तरोताजा  , क्लांत  नहीं  .

लेकिन चित्त  अशांत  हो  उठता  है , किसी भी कार्य को  करने की  इच्छा  नहीं होती  . नकार  भरी भावनाओं  के रेलें दिमाग़  में  चले आते हैं  और अनमनी  सी मनःस्थिति  में  हम कह उठते हैं  कि  _ "    आज चित्त  अच्छा  नहीं  है  "      या   "     मेरा चित्त  खिन्न  है    "   वगैरह,  वगैरह  .

ऐसे में  किसी  प्रबुद्ध  व्यक्ति  के मन में  सहज रूप से एक प्रश्न  आकार  लेता है    ...   कि चित्त  वास्तव में  है  क्या  ? कैसा  । वह चित्त  ? 

Tuesday, November 19, 2019

आज के दिन में क्या विशेष है , अगर यह लिखने बैठूं , तो सबसे पहले यह
कि
यह लाक हो गया ब्लॉग खुल पड़ा है आज . ( बेशक नेहा की सहायता से  )

अभी तक हिमालय ट्रेकिंग की बात पूरी नहीं लिख पाई हूँ ,

हालाँकि वह यात्रा हर दिन याद  रहती है , वह अनुभव , वह गहरी थकन ,
 वह समय मेरे साथ चला है  - डेनमार्क में , इटली और जर्मनी में - हर जगह . भारत  लौट आने पर भी वह अनुभूति हर दिन याद आती है .

हिमालय देवता है.... .   क्या इसलिए ?
यह तो एक कारण है ही , यह भी कारण है कि मैं स्वयं  को विश्वाश दिलाना चाहती हूँ कि उतनी बड़ी यात्रा मैंने की है .

Thursday, March 8, 2018

NEW BOOK

एक वर्ष बाद इसे खोला है , वह भी किसी की सहायता से , यह कहानी संग्रह , जो न जाने कब से अपेक्षित था .   इसे छापा था अनामिका पब्लिशर्स ने .  

Saturday, December 24, 2016

आज के दिन यह ब्लॉग  खुद से खोलना मैंने सिखा , अब यहाँ पोस्ट करूंगी .
इसके पहले नेहा पाखी ने इस पर पोस्ट डाले थे .